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Genesis - -उत्पत्ति

अध्याय : 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50

1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त या, और उस ने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृझ का फल न खाना ?
2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृझोंके फल हम खा सकते हैं।
3 पर जो वृझ बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।
4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे,
5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखे खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।
6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृझ का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिथे चाहने योग्य भी है, तब उस ने उस में से तोड़कर खाया; और अपके पति को भी दिया, और उस ने भी खाया।
7 तब उन दोनोंकी आंखे खुल गई, और उनको मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिथे।
8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता या उसका शब्द उनको सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृझोंके बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।
9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकारकर आदम से पूछा, तू कहां है?
10 उस ने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुनकर डर गया क्योंकि मैं नंगा या; इसलिथे छिप गया।
11 उस ने कहा, किस ने तुझे चिताया कि तू नंगा है? जिस वृझ का फल खाने को मै ने तुझे बर्जा या, क्या तू ने उसका फल खाया है?
12 आदम ने कहा जिस स्त्री को तू ने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृझ का फल मुझे दिया, और मै ने खाया।
13 तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, तू ने यह क्या किया है? स्त्री ने कहा, सर्प ने मुझे बहका दिया तब मै ने खाया।
14 तब यहोवा परमेश्वर ने सर्प से कहा, तू ने जो यह किया है इसलिथे तू सब घरेलू पशुओं, और सब बनैले पशुओं से अधिक शापित है; तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा :
15 और मै तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुंगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।
16 फिर स्त्री से उस ने कहा, मै तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा; तू पीड़ित होकर बालक उत्पन्न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा।
17 और आदम से उस ने कहा, तू ने जो अपक्की पत्नी की बात सुनी, और जिस वृझ के फल के विषय मै ने तुझे आज्ञा दी यी कि तू उसे न खाना उसको तू ने खाया है, इसलिथे भूमि तेरे कारण शापित है: तू उसकी उपज जीवन भर दु:ख के साय खाया करेगा :
18 और वह तेरे लिथे कांटे और ऊंटकटारे उगाएगी, और तू खेत की उपज खाएगा ;
19 और अपके माथे के पक्कीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा।
20 और आदम ने अपक्की पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई।
21 और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिथे चमड़े के अंगरखे बनाकर उनको पहिना दिए।
22 फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिथे अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ाकर जीवन के वृझ का फल भी तोड़ के खा ले और सदा जीवित रहे।
23 तब यहोवा परमेश्वर ने उसको अदन की बाटिका में से निकाल दिया कि वह उस भूमि पर खेती करे जिस मे से वह बनाया गया या।
24 इसलिथे आदम को उस ने निकाल दिया और जीवन के वृझ के मार्ग का पहरा देने के लिथे अदन की बाटिका के पूर्व की ओर करुबोंको, और चारोंओर घूमनेवाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्त कर दिया।।

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