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Deuteronomy - व्यवस्थाविवरण

अध्याय : 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34

1 इस्त्राएलियोंसे जिस वाचा के बान्धने की आज्ञा यहोवा ने मूसा को मोआब के देश में दी उसके थे ही वचन हैं, और जो वाचा उस ने उन से होरेब पहाड़ पर बान्धी यी यह उस से अलग है।
2 फिर मूसा ने सब इस्त्राएलियोंको बुलाकर कहा, जो कुछ यहोवा ने मिस्र देश में तुम्हारे देखते फिरौन और उसके सब कर्मचारियों, और उसके सारे देश से किया वह तुम ने देखा है;
3 वे बड़े बड़े पक्कीझा के काम, और चिन्ह, और बड़े बड़े चमत्कार तेरी आंखोंके साम्हने हुए;
4 परन्तु यहोवा ने आज तक तुम को न तो समझने की बुद्धि, और न देखने की आंखें, और न सुनने के कान दिए हैं।
5 मैं तो तुम को जंगल में चालीस वर्ष लिए फिरा; और न तुम्हारे तन पर वस्त्र पुराने हुए, और न तेरी जूतियां तेरे पैरोंमें पुरानी हुई;
6 रोटी जो तुम नहीं खाने पाए, और दाखमधु और मदिरा जो तुम नहीं पीने पाए, वह इसलिथे हुआ कि तुम जानो कि मैं यहोवा तुम्हारा परमेश्वर हूं।
7 और जब तुम इस स्यान पर आए, तब हेशबोन का राजा सीहोन और बाशान का राजा ओग, थे दोनो युद्ध के लिथे हमारा साम्हना करने को निकल आए, और हम ने उनको जीतकर उनका देश ले लिया;
8 और रूबेनियों, गादियों, और मनश्शे के आधे गोत्र के लोगोंको निज भाग करके दे दिया।
9 इसलिथे इस वाचा की बातोंका पालन करो, ताकि जो कुछ करो वह सुफल हो।।
10 आज क्या वृद्ध लोग, क्या सरदार, तुम्हारे मुख्य मुख्य पुरूष, क्या गोत्र गोत्र के तुम सब इस्राएली पुरूष,
11 क्या तुम्हारे बालबच्चे और स्त्रियां, क्या लकड़हारे, क्या पनभरे, क्या तेरी छावनी में रहनेवाले परदेशी, तुम सब के सब अपके परमेश्वर यहोवा के साम्हने इसलिथे खड़े हुए हो,
12 कि जो वाचा तेरा परमेश्वर यहोवा आज तुझ से बान्धता है, और जो शपय वह आज तुझ को खिलाता है, उस में तू साफी हो जाए;
13 इसलिथे कि उस वचन के अनुसार जो उसने तुझ को दिया, और उस शपय के अनुसार जो उसने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब, तेरे पूर्वजोंसे खाई यी, वह आज तुझ को अपक्की प्रजा ठहराए, और आप तेरा परमेश्वर ठहरे।
14 फिर मैं इस वाचा और इस शपय में केवल तुम को नहीं,
15 परन्तु उनको भी, जो आज हमारे संग यहां हमारे परमेश्वर यहोवा के साम्हने खड़े हैं, और जो आज यहां हमारे संग नहीं हैं, साफी करता हूं।
16 तुम जानते हो कि जब हम मिस्र देश में रहते थे, और जब मार्ग में की जातियोंके बीचोंबीच होकर आ रहे थे,
17 तब तुम ने उनकी कैसी कैसी घिनौनी वस्तुएं, और काठ, पत्यर, चांदी, सोने की कैसी मूरतें देखीं।
18 इसलिथे ऐसा न हो, कि तुम लोगोंमें ऐसा कोई पुरूष, वा स्त्री, वा कुल, वा गोत्र के लोग होंजिनका मन आज हमारे परमेश्वर यहोवा से फिर जाए, और वे जाकर उन जातियोंके देवताओं की उपासना करें; फिर ऐसा न हो कि तुम्हारे मध्य ऐसी कोई जड़ हो, जिस से विष वा कडुआ बीज उगा हो,
19 और ऐसा मनुष्य इस शाप के वचन सुनकर अपके को आशीर्वाद के योग्य माने, और यह सोचे कि चाहे मैं अपके मन के हठ पर चलूं, और तृप्त होकर प्यास को मिटा डालूं, तौभी मेरा कुशल होगा।
20 यहोवा उसका पाप झमा नहीं करेगा, वरन यहोवा के कोप और जलन का धुंआ उसको छा लेगा, और जितने शाप इस पुस्तक में लिखें हैं वे सब उस पर आ पकेंगे, और यहोवा उसका नाम धरती पर से मिटा देगा।
21 और व्यवस्या की इस पुस्तक में जिस वाचा की चर्चा है उसके सब शापोंके अनुसार यहोवा उसको इस्राएल के सब गोत्रोंमें से हानि के लिथे अलग करेगा।
22 और आनेवाली पीढिय़ोंमें तुम्हारे वंश के लोग जो तुम्हारे बाद उत्पन्न होंगे, और पकेदेशी मनुष्य भी जो दूर देश से आएंगे, वे उस देश की विपत्तियोंऔर उस में यहोवा के फैलाए हुए रोग देखकर,
23 और यह भी देखकर कि इसकी सब भूमि गन्धक और लोन से भर गई है, और यहां तक जल गई है कि इस में न कुछ बोया जाता, और न कुछ जम सकता, और न घास उगती है, वरन सदोम और अमोरा, अदमा और सबोयीम के समान हो गया है जिन्हें यहोवा ने अपके कोप और जलजलाहट में उलट दिया या;
24 और सब जातियोंके लोग पूछेंगे, कि यहोवा ने इस देश से ऐसा क्योंकिया? और इस बड़े कोप के भड़कने का क्या कारण है?
25 तब लोग यह उत्तर देंगे, कि उनके पूर्वजोंके परमेश्वर यहोवा ने जो वाचा उनके साय मिस्र देश से निकालने के समय बान्धी यी उसको उन्होंने तोड़ा है।
26 और पराए देवताओं की उपासना की है जिन्हें वे पहिले नहीं जानते थे, और यहोवा ने उनको नहीं दिया या;
27 इसलिथे यहोवा का कोप इस देश पर भड़क उठा है, कि पुस्तक मे लिखे हुए सब शाप इस पर आ पकें;
28 और यहोवा ने कोप, और जलजलाहट, और बड़ा ही क्रोध करके उन्हें उनके देश में से उखाड़ कर दूसरे देश में फेंक दिया, जैसा कि आज प्रगट है।।
29 गुप्त बातें हमारे परमेश्वर यहोवा के वश में हैं; परन्तु जो प्रगट की गई हैं वे सदा के लिथे हमारे और हमारे वंश में रहेंगी, इसलिथे कि इस व्यवस्या की सब बातें पूरी ही जाएं।।

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