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1 Samuel - 1 शमूएल

अध्याय : 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31

1 और वह बालक शमूएल एली के साम्हने यहोवा की सेवा टहल करता या। और उन दिनोंमें यहोवा का वचन दुर्लभ या; और दर्शन कम मिलता या।
2 और उस समय ऐसा हुआ कि (एली की आंखे तो धुंघली होने लगी यीं और उसे न सूफ पड़ता या) जब वह अपके स्यान में लेटा हुआ या,
3 और परमेश्वर का दीपक अब तक बुफा नहीं या, और शमूएल यहेवा के मन्दिर में जंहा परमेश्वर का सन्दूक या लेटा या;
4 तब यहोवा ने शमूएल को पुकारा; और उस ने कहा, क्या आज्ञा!
5 तब उस ने एली के पास दौड़कर कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। वह बोला, मैं ने नहीं पुकारा; फिर जा लेट रह। तो वह जाकर लेट गया।
6 तब यहोवा ने फिर पुकार के कहा, हे शमूएल! शमूएल उठकर एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। उस ने कहा, हे मेरे बेटे, मैं ने नहीं पुकारा; फिर जा लेट रह।
7 उस समय तक तो शमूएल यहोवा को नहीं पहचानता या, और न तो यहोवा का वचन ही उस पर प्रगट हुआ या।
8 फिर तीसरी बार यहोवा ने शमूएल को पुकारा। और वह उठके एली के पास गया, और कहा, क्या आज्ञा, तू ने तो मुझे पुकारा है। तब एली ने समझ लिया कि इस बालक को यहोवा ने पुकारा है।
9 इसलिथे एली ने शमूएल से कहा, जा लेट रहे; और यदि वह तुझे फिर पुकारे, तो तू कहना, कि हे यहोवा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है तब शमूएल अपके स्यान पर जाकर लेट गया।
10 तब यहोवा आ खड़ा हुआ, और पहिले की नाईं पुकारा, शमूएल! शमूएल! शमूएल ने कहा, कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।
11 यहोवा ने शमूएल से कहा, सुन, मैं इस्राएल में एक काम करने पर हूं, जिससे सब सुननेवालोंपर बड़ा सन्नाटा छा जाएगा।
12 उस दिन मैं एली के विरूद्ध वह सब कुछ पूरा करूंगा जो मैं ने उसके घराने के विषय में कहा, उसे आरम्भ से अन्त तक पूरा करूंगा।
13 क्योंकि मैं तो उसको यह कहकर जता चुका हूं, कि मैं उस अधर्म का दण्ड जिसे वह जानता है सदा के लिथे उसके घर का न्याय करूंगा, क्योंकि उसके पुत्र आप शापित हुए हैं, और उस ने उन्हें नहीं रोका।
14 इस कारण मैं ने एली के घराने के विषय यह शपय खाई, कि एली के घराने के अधर्म का प्रायश्चित न तो मेलबलि से कभी होगा, और न अन्नबलि से।
15 और शमूएल भोर तक लेटा रहा; तब उस ने यहोवा के भवन के किवाड़ोंको खोला। और शमूएल एली को उस दर्शन की बातें बतानें से डरा।
16 तब एली ने शमूएल को पुकारकर कहा, हे मेरे बेटे, शमूएल! वह बोला, क्या आज्ञा।
17 तब उस ने पूछा, वह कौन सी बात है जो यहोवा ने तुझ से कही है? उसे मुझ से न छिपा। जो कुछ उस ने तुझ से कहा हो यदि तू उस में से कुछ भी मुझ से छिपाए, तो परमेश्वर तुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे।
18 तब शमूएल ने उसको रत्ती रत्ती बातें कह सुनाईं, और कुछ भी न छिपा रखा। वह बोला, वह तो यहोवा है; जो कुछ वह भला जाने वही करें।
19 और शमूएल बड़ा होता गया, और यहोवा उसके संग रहा, और उस ने उसकी कोई भी बात निष्फल होने नहीं दी।
20 और दान से बेर्शेबा तक के रहनेवाले सारे इस्राएलियोंने जान लिया कि शमूएल यहोवा का नबी होने के लिथे नियुक्त किया गया है।
21 और यहोवा ने शीलो में फिर दर्शन दिया, क्योंकि यहोवा ने अपके आप को शीलो में शमूएल पर अपके वचन के द्वारा प्रगट किया।।

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