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Verses
Ezra - एज्रा
अध्याय :
1
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9
10
1
जब एज्रा परमेश्वर के भवन के साम्हने पड़ा, रोता हुआ प्रार्यना और पाप का अंगीकार कर रहा या, तब इस्राएल में से पुरुषों, स्त्रियोंऔर लड़केवालोंकी एक बहुत बड़ी मणडली उसके पास इकट्ठी हुई; और लोग बिलक बिलक कर रो रहे थे।
2
तब यहीएल का पुत्र शकन्याह जो एलाम के वुश में का या, एज्रा से कहने लगा, हम लोगोंने इस देश के लोगोंमें से अन्यजाति स्त्रियां ब्याह कर अपके परमेश्वर का विश्वासघात तो किया है, परन्तु इस दशा में भी इस्राएल के लिथे आश है।
3
अब हम अपके परमेश्वर से यह वाचा बान्धें, कि हम अपके प्रभुकी सम्मति और अपके परमेश्वर की आज्ञा सुनकर यरयरानेवालोंकी सम्मति के अनुसार ऐसी सब स्त्रियोंको और उनके लड़केवालोंको दूर करें; और व्यवस्या के अनुसार काम किया जाए।
4
तू उठ, क्योंकि यह काम तेरा ही है, और हम तेरे साय है; इसलिथे हियाव बान्धकर इस काम में लग जा।
5
तब एज्रा उठा, और याजकों, लेवियोंऔर सब इस्राएलियोंके प्रधानोंको यह शपय खिलाई कि हम इसी वचन के अनुसार करेंगे; और उन्होंने वैसी ही शपय खाई।
6
तब बज्रा परमेश्वर के भवन के साम्हने से उठा, और एल्याशीब के पुत्र योहानान की कोठरी में गया, और वहां पहुंचकर न तो रोटी खाई, न पानी पिया, क्योंकि वह बन्धुआई में से निकल आए हुओं के विश्वासघात के कारण शोक करता रहा।
7
तब उन्होंने यहूदा और यरूशलेम में रहनेवाले बन्धुआई में से आए हुए सब लोगोंमें यह प्रचार कराया, कि तुम यरूशलेम में इाट्ठे हो;
8
और जो कोई हाकिमोंऔर पुरनियोंकी सम्मति न मानेगा और तीन दिन के भीतर न आए तो उसकी समस्त धन-सम्पत्ति नष्ट की जाएगी और वह आप बन्धुआई से आए हुओं की सभा से अलग किया जाएगा।
9
तब यहूदा और बिन्यामीन के सब मनुष्य तीन दिन के भीतर यरूशलेम में इकट्ठे हुए; यह नौवें महीने के बीसवें दिन में हुआ; और सब लोग परमेश्वर के भवन के चौक में उस विषय के कारण और फड़ी के मारे कांपके हुए बैठे रहे।
10
तब एज्रा याजक खड़ा होकर उन से कहने लगा, तुम लोगोंने विश्वासघात करके अन्यजाति-स्त्रियां ब्याह लीं, और इस से इस्राएल का दोष बढ़ गया है।
11
सो अब अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा के साम्हने अपना पाप मान लो, और उसकी इच्छा पूरी करो, और इस देश के लोगोंसे और अन्यजातिस्त्रियोंसे न्यारे हो जाओ।
12
तब पूरी मणडली के लोगोंने ऊंचे शब्द से कहा, जैसा तू ने कहा है, वैसा ही हमें करना उचित है।
13
परन्तु लोग बहुत हैं, और फड़ी का समय है, और हम बाहर खड़े नहीं रह सकते, और यह दो एक दिन का काम नहीं है, क्योंकि हम ने इस बात में बड़ा अपराध किया है।
14
समस्त मणडली की ओर से हमारे हाकिम नियुक्त किए जाएं; और जब तक हमारे परमेश्वर का भड़का हुआ कोप हम से दूर न हो, और यह काम निपट न जाए, तब तक हमारे नगरोंके जितने निवासियोंने अन्यजाति-स्त्रियां ब्याह ली हों, वे नियत समयोंपर आया करें, और उनके संग एक नगर के पुरनिथे और न्यायी आएं।
15
इसके विरुद्ध केवल असाहेल के पुत्र योनातान और तिकवा के पुत्र यहजयाह खड़े हुए, और मशुल्लाम और शब्बतै लेवियोंने उनकी सहाथता की।
16
परन्तु बन्धुआई से आए हुए लोगोंने वैसा ही किया। तब एज्रा याजक और पितरोंके घरानोंके कितने मुख्य पुरुष अपके अपके पितरोंके घराने के अनुसार अपके सब नाम लिखाकर अलग किए गए, और दसवें महीने के पहिले दिन को इस बात की तहकीकात के लिथे बैठे।
17
और पहिले महीने के पहिले दिन तक उन्होंने उन सब पुरुषोंकी बात निपटा दी, जिन्होंने अन्यजाति-स्त्रियोंको ब्याह लिया या।
18
और याजकोंकी सन्तान में से; थे जन पाए गए जिन्होंने अन्यजाति-स्त्रियोंको ब्याह लिया या, अर्यात् थेशू के पुत्र, योसादाक के पुत्र, और उसके भाई मासेयाह, एलीआज़र, यारीब और गदल्याह।
19
इन्होंने हाथ मारकर वचन दिया, कि हम अपक्की स्त्रियोंको निकाल देंगे, और उन्होंने दोषी ठहरकर, अपके अपके दोष के कारण एक एक मेढ़ा बलि किया।
20
और इम्मेर की सन्तान में से; हनानी और जबद्याह,
21
और हारीम की सन्तान में से; मासेयाह, एलीयाह, शमायाह, यहीएल और उज्जियाह।
22
और पशहूर की सन्तान में से; उल्योएनै, मासेयाह, इशमाएल, नतनेल, योजाबाद और एलासा।
23
फिर लेवियोंमें से; योजाबाद, शिमी, केलायाह जो कलीता कहलाता है, पतह्याह, यहूदा और एलीआज़र।
24
और गवैयोंमें से; एल्याशीव और द्वारपालोंमें से शल्लूम, तेलेम और ऊरी।
25
और इस्राएल में से; परोश की सन्तान में रम्याह, यिज्जियाह, मल्कियाह, मियामीन, एलीआज़र, मल्कियाह और बनायाह।
26
और एलाम की सन्तान में से; मत्तन्याह, जकर्याह, यहीएल अब्दी, यरेमोत और एलियाह।
27
और जतू की सन्तान में से; एल्योएनै, एल्याशीब, सत्तन्याह, यरेमोत, जाबाद और अजीजा।
28
और बेबै की सन्तान में से; यहोहानान, हनन्याह, जब्बै और अतलै।
29
और बानी की सन्तान में से; मशुल्लाम, मल्लूक, अदायाह, याशूब, शाल और यरामोत।
30
और पहतमोआब की सन्तान में से; अदना, कलाल, बनायाह, मासेयाह, मत्तन्याह, बसलेल, बिन्नूई और मनश्शे।
31
और हारीम की सन्तान में से; एलीआज़र, यिश्शियाह, मल्कियाह, शमायाह, शिमोन;
32
बिन्यामीन, मल्लूक और शमर्याह।
33
और हाशूम की सन्तान में से; मत्तनै, मत्तत्ता, जाबाद, एलीपेलेत, यरेमै, मनश्शे और शिमी।
34
और बानी की सन्तान में से; मादै, अम्राम, ऊएल;
35
बनायाह, बेदयाह, कलूही;
36
बन्याह, मरेमोत, एल्याशीब;
37
मत्तन्याह, मत्तनै, यासू;
38
वानी, विन्नूई, शिमी;
39
शेलेम्याह, नातान, अदायाह;
40
मक्नदबै, शाशै, शारै;
41
अजरेल, शेलेम्याह, शेमर्याह;
42
शल्लूम, अमर्याह और योसेफ।
43
और नबो की सन्तान में से; यीएल, मत्तिन्याह, जाबाद, जबीना, यद्दो, योएल और बनायाह।
44
इन सभोंने अन्यजाति-स्त्रियां ब्याह ली यीं, और कितनोंकी स्त्र्ियोंसे लड़के भी उत्पन्न हुए थे।
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