Home
| |
Audio
| |
Index
| |
Verses
Ecclesiastes - सभोपदेशक
अध्याय :
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
1
अपक्की जवानी के दिनोंमें अपके सृजनहार को स्मरण रख, इस से पहिले कि विपत्ति के दिन और वे वर्ष आएं, जिन में तू कहे कि मेरा मन इन में नहीं लगाता।
2
इस से पहिले कि सूर्य और प्रकाश और चन्द्रमा और तारागण अंधेरे हो जाएं, और वर्षा होने के बादल फिर घिर जाएं;
3
उस समय घर के पहरूथे कांपेंगे, और बलवन्त फुक जायंगे, और पिसनहारियां योड़ी रहने के कारण काम छोड़ देंगी, और फरोखोंमें से देखनेवालियां अन्धी हो जाएगी,
4
और सड़क की ओर के किवाड़ बन्द होंगे, और चक्की पीसने का शब्द धीमा होगा, और तड़के चिडिय़ा बोलते ही एक उठ जाएगा, और सब गानेवालियोंका शब्द धीमा हो जाएगा।
5
फिर जो ऊंचा हो उस से भय खाया जाएगा, और मार्ग में डरावनी वस्तुएं मानी जाएंगी; और बादाम का पेड़ फूलेगा, और टिड्डी भी भारी लगेगी, और भूख बढ़ानेवाला फल फिर काम न देगा; क्योंकि मनुष्य अपके सदा के घर को जाथेगा, और रोने पीटनेवाले सड़क सड़क फिरेंगे।
6
उस समय चान्दी का तार दो टूकड़े हो जाएगा और सोने का कटोरा टूटेगा; और सोते के पास घड़ा फूटेगा, और कुण्ड के पास रहट टूट जाएगा,
7
जब मिट्टी ज्योंकी त्योंमिट्टी में मिल जाएगी, और आत्मा परमेश्वर के पास जिस ने उसे दिया लौट जाएगी।
8
उपकेशक कहता है, सब व्यर्य ही व्यर्य; सब कुछ व्यर्य है।
9
उपकेशक जो बुद्धिमान या, वह प्रजा को ज्ञान भी सिखाता रहा, और ध्यान लगाकर और पूछपाछ करके बहुत से नीतिवचन क्रम से रखता या।
10
उपकेशक ने मनभावने शब्द खोजे और सीधाई से थे सच्ची बातें लिख दीं।।
11
बुद्धिमानोंके वचन पैनोंके समान होते हैं, और सभाओं के प्रधानोंके वचन गाड़ी हुई कीलोंके समान हैं, क्योंकि एक ही चरवाहे की ओर से मिलते हैं।
12
हे मेरे पुत्र, इन्ही में चौकसी सीख। बहुत पुस्तकोंकी रचना का अन्त नहीं होता, और बहुत पढ़ना देह को यका देता है।।
13
सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है।
14
क्योंकि परमेश्वर सब कामोंऔर सब गुप्त बातोंका, चाहे वे भली होंया बुरी, न्याय करेगा।।
Page Top
| |
अगला-
| |
सूचिपृष्ठ
| |
मुखपृष्ठ
Full online version
here
[with search engine, multilingual display and audio Bible]