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Isaiah - यशायाह

अध्याय : 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66

1 मिस्र के विषय में भारी भविष्यवाणी। देखो, यहोवा शीघ्र उड़नेवाले बादल पर सवार होकर मिस्र में आ रहा है;
2 और मिस्र की मूरतें उसके आने से यरयरा उठेंगी, और मिस्रियोंका ह्रृदय पानी-पानी हो जाएगा। और मैं मिस्रियोंको एक दूसरे के विरूद्ध उभारूंगा, और वे आपस में लड़ेंगे, प्रत्थेक अपके भाई से और हर एक अपके पड़ोसी से लड़ेगा, नगर नगर में और राज्य राज्य में युद्ध छिड़ेंगा;
3 और मिस्रियोंकी बुद्धि मारी जाएगी और मैं उनकी युक्तियोंको व्यर्य कर दूंगा; और वे अपक्की मूरतोंके पास और ओफोंऔर फुसफुसानेवाले टोन्होंके पास जा जाकर उन से पूछेंगे;
4 परन्तु मैं मिस्रियोंको एक कठोर स्वामी के हाथ में कर दूंगा; और एक क्रूर राजा उन पर प्रभुता करेगा, प्रभु सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।।
5 और समुद्र का जल सूख जाएगा, और महानदी सूख कर खाली हो जाएगी;
6 और नाले बसाने लगेंगे, और मिस्र की नहरें भी सूख जाएंगी, और नरकट और हूगले कुम्हला जाएंगे।
7 नील नदी के तीर पर के कछार की घास, और जो कुछ नील नदी के पास बोया जाएगा वह सूखकर नष्ट हो जाएगा, और उसका पता तक न लगेगा।
8 सब मछुवे जितने नील नदी में बंसी डालते हैं विलाप करेंगे और लम्बी लम्बी सासें लेंगे, और जो जल के ऊपर जाल फेंकते हैं वे निर्बल हो जाएंगे।
9 फिर जो लोग धुने हुए सन से काम करते हैं और जो सूत से बुनते हैं उनकी आशा टूट जाएगी।
10 मिस्र के रईस तो निराश और उसके सब मजदूर उदास हो जाएंगे।।
11 निश्चय सोअन के सब हाकिम मूर्ख हैं; और फिरौन के बुद्धिमान मन्त्रियोंकी युक्ति पशु की सी ठहरी। फिर तुम फिरौन से कैसे कह सकते हो कि मैं बुद्धिमानोंका पुत्र और प्राचीन राजाओं की सन्तान हूं?
12 अब तेरे बुद्धिमान कहां है? सेनाओं के यहोवा ने मिस्र के विषय जो युक्ति की है, उसको यदि वे जानते होंतो तुझे बताएं।
13 सोअन के हाकिम मूढ़ बन गए हैं, नोप के हाकिमोंने धोखा खाया है; और जिन पर मिस्र के गोत्रोंके प्रधान लोगोंका भरोसा या उन्होंने मिस्र को भरमा दिया है।
14 यहोवा ने उस में भ्रमता उत्पन्न की है; उन्होंने मिस्र को उसके सारे कामोंमें वमन करते हुए मतवाले की नाई डगमगा दिया है।
15 और मिस्र के लिथे कोई ऐसा काम न रहेगा जो सिर वा पूंछ से अयवा प्रधान वा साधारण से हो सके।।
16 उस समय मिस्री, स्त्रियोंके समान हो जाएंगे, और सेनाओं का यहोवा जो अपना हाथ उन पर बढ़ाएगा उसके डर के मारे वे यरयराएंगे और कांप उठेंगे।
17 ओर यहूदा का देश मिस्र के लिथे यहां तक भय का कारण होगा कि जो कोई उसकी चर्चा सुनेगा वह यरयरा उठेगा; सेनाओं के यहोवा की उस युक्ति का यही फल होगा जो वह मिस्र के विरूद्ध करता है।।
18 उस समय मिस्र देश में पांच नगर होंगे जिनके लोग कनान की भाषा बोलेंगे और यहोवा की शपय खाथेंगे। उन में से एक का नाम नाशनगर रखा जाएगा।।
19 उस समय मिस्र देश के बीच में यहोवा के लिथे एक वेदी होगी, और उसके सिवाने के पास यहोवा के लिथे एक खंभा खड़ा होगा।
20 वह मिस्र देश में सेनाओं के यहोवा के लिथे चिन्ह और साझी ठहरेगा; और जब वे अंधेर करनेवाले के कारण यहोवा की दोहाई देंगे, तब वह उनके पास एक उद्धारकर्ता और रझक भेजेगा, और उन्हें मुक्त करेगा।
21 तब यहोवा अपके आप को मिस्रियोंपर प्रगट करेगा; और मिस्री उस समय यहोवा को पहिचानेंगे और मेलबलि और अन्नबलि चढ़ाकर उसकी उपासना करेंगे, और यहोवा के लिथे मन्नत मानकर पूरी भी करेंगे।
22 और यहोवा मिस्रियोंको मारेगा, और मारेगा और चंगा भी करेगा, और वे यहोवा की ओर फिरेंगे और वह उनकी बिनती सुनकर उनको चंगा करेगा।।
23 उस समय मिस्र से अश्शूर जाने का एक राजमार्ग होगा, और अश्शूरी मिस्र में आएंगे और मिस्री लोग अश्शूर को जाएंगे, और मिस्री अश्शूरियोंके संग मिलकर आराधना करेंगे।।
24 उस समय इस्राएल, मिस्र और अश्शूर तीनोंमिलकर पृय्वी के लिथे आशीष का कारण होंगे।
25 क्योंकि सेनाओं का यहोवा उन तीनोंको यह कहकर आशीष देगा, धन्य हो मेरी प्रजा मिस्र, और मेरा रख हुआ अश्शूर, और मेरा निज भाग इस्राएल।।

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