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Isaiah - यशायाह

अध्याय : 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66

1 आमोस के पुत्र यशायाह का वचन, जो उस ने यहूदा और यरूशलेम के विषय में दर्शन में पाया।।
2 अन्त के दिनोंमें ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ोंपर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाडिय़ोंसे अधिक ऊंचा किया जाएगा; और हर जाति के लागे धारा की नाई उसकी ओर चलेंगें।
3 और बहुत देशोंके लागे आएंगे, और आपस में कहेंगे: आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्वर के भवन में जाएं; तब वह हमको अपके मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पयोंपर चलेंगे। क्योंकि यहोवा की व्यवस्या सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा।
4 वह जाति जाति का न्याय करेगा, और देश देश के लोगोंके फगड़ोंको मिटाएगा; और वे अपक्की तलवारें पीटकर हल के फाल और अपके भालोंको हंसिया बनाएंगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरूद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे।।
5 हे याकूब के घराने, आ, हम यहोवा के प्रकाश में चलें।।
6 तू ने अपक्की प्रजा याकूब के घराने को त्याग दिया है, क्योंकि वे पूविर्योंके व्यवहार पर तन मन से चलते और पलिश्तियोंकी नाई टोना करते हैं, और परदेशियोंके साय हाथ मिलाते हैं।
7 उनका देश चान्दी और सोने से भरपूर है, और उनके रय अनगिनित हैं।
8 उनका देश मूरतोंसे भरा है; वे अपके हाथोंकी बनाई हुई वस्तुओं को जिन्हें उनहोंने अपक्की उंगलियोंसे संवारा है, दण्डवत्‌ करते हैं।
9 इस से मनुष्य फुकते, और बड़े मनुष्य प्रणाम करते हैं, इस कारण उनको झमा न कर!
10 यहोवा के भय के कारण और उसके प्रताप के मारे चट्टान में घुस जा, और मिट्टी में छिप जा।
11 क्योंकि आदमियोंकी घमण्ड भरी आंखें नीची की जाएंगी और मनुष्योंका घमण्ड दूर किया जाएगा; और उस दिन केवल यहोवा ही ऊंचे पर विराजमान रहेगा।।
12 क्योंकि सेनाओं के यहोवा का दिन सब घमण्डियोंऔर ऊंची गर्दनवालोंपर और उन्नति से फूलनेवालोंपर आएगा; और वे फुकाए जाएंगे;
13 और लबानोन के सब देवदारोंपर जो ऊंचे और बड़ें हैं;
14 बासान के सब बांजवृझोंपर; और सब ऊंचे पहाड़ोंऔर सब ऊंची पहाडिय़ोंपर;
15 सब ऊंचे गुम्मटोंऔर सब दृढ़ शहरपनाहोंपर;
16 तर्शीश के सब जहाजोंऔर सब सुन्दर चित्रकारी पर वह दिन आता है।
17 और मनुष्य का गर्व मिटाया जाएगा, और मनुष्योंका घमण्ड नीचा किया जाएगा; और उस दिन केवल यहोवा ही ऊंचे पर विराजमान रहेगा।
18 और मूरतें सब की सब नष्ट हो जाएंगी।
19 और जब यहोवा पृय्वी के कम्पित करने के लिथे उठेगा, तब उसके भय के कारण और उसके प्रताप के मारे लोग चट्टानोंकी गुफाओं और भूमि के बिलोंमें जा घुसेंगे।।
20 उस दिन लोग अपक्की चान्दी-सोने की मूरतोंको जिन्हें उन्होंने दण्डवत्‌ करने के लिथे बनाया या, छछून्दरोंऔर चमगीदड़ोंके आगे फेंकेंगे,
21 और जब यहोवा पृय्वी को कम्पित करने के लिथे उठेगा तब वे उसके भय के कारण और उसके प्रताप के मारे चट्टानोंकी दरारोंओर पहाडिय़ोंके छेदोंमें घुसेंगे।
22 सो तुम मनुष्य से पके रहो जिसकी श्वास उसके नयनोंमें है, क्योंकि उसका मूल्य है ही क्या?

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