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Jeremiah - यिर्मयाह
अध्याय :
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1
वे कहते हैं, यदि कोई अपक्की पत्नी को त्याग दे, और वह उसके पास से जाकर दूसरे पुरुष की हो जाए, तो वह पहिला क्या उसके पास फिर जाएगा? क्या वह देश अति अशुद्ध न हो जाएगा? यहोवा की यह वाणी है कि तू ने बहुत से प्रेमियोंके साय व्यभिचार किया है, क्या तू अब मेरी ओर फिरेगी?
2
मुण्डे टीलोंकी ओर आंखें उठाकर देख ! ऐसा कौन सा स्यान है जहां तू ने कुकर्म न किया हो? मागॉं में तू ऐसी बैठी जैसे एक अरबी जंगल में। तू ने देश को अपके व्यभिचार से अशुद्ध कर दिया है।
3
इसी कारण फडिय़ां और बरसात की पिछली वर्षा नहीं होती; तौभी तेरा माया वेश्या का सा है, तू लज्जित होना ही नहीं जानती।
4
क्या तू अब मुझे पुकारकर कहेगी, हे मेरे पिता, तू ही मेरी जवानी का सायी है?
5
क्या वह मन में सदा क्रोध रखे रहेगा? क्या वह उसको सदा बनाए रहेगा? तू ने ऐसा कहा तो है, परन्तु तू ने बुरे काम प्रबलता के साय किए हैं।
6
फिर योशिय्याह राजा के दिनोंमें यहोवा ने मुझ से यह भी कहा, क्या तू ने देखा कि भटकनेवाली इस्राएल ने क्या किया है? उस ने सब ऊंचे पहाड़ोंपर और सब हरे पेड़ोंके तले जा जाकर व्यभिचार किया है।
7
तब मैं ने सोवा, जब थे सब काम वह कर चुके तब मेरी ओर फिरेगी; परन्तु वह न फिरी, और उसकी विश्वासघाती बहिन यहूदा ने यह देखा।
8
फिर मैं ने देखा, जब मैं ने भटकनेवाली इस्राएल को उसके व्यभिचार करने के कारण त्यागकर उसे त्यागपत्र दे दिया; तौभी उसकी विश्वासघाती बहिन यहूदा न डरी, वरन जाकर वह भी व्यभिचारिणी बन गई।
9
उसके निर्लज्ज-व्यभिचारिणी होने के कारण देश भी अशुद्ध हो गया, उस ने पत्यर और काठ के साय भी व्यभिचार किया।
10
इतने पर भी उसकी विश्वासघाती बहिन यहूदा पूर्ण मन से मेरी ओर नहीं फिरी, परन्तु कपट से, यहोवा की यही वाणी है।
11
और यहोवा ने मुझ से कहा, भटकनेवाली इस्राएल, विश्वासघातिन यहूदा से कम दोषी निकली है।
12
तू जाकर उत्तर दिशा में थे बातें प्रचार कर, यहोवा की यह वाणी है, हे भटकनेवाली इस्राएल लौट आ, मैं तुझ पर क्रोध की दृष्टि न करूंगा; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं करुणामय हूँ; मैं सर्वदा क्रोध न रखे रहूंगा।
13
केवल अपना यह अधर्म मान ले कि तू अपके परमेश्वर यहोवा से फिर गई और सब हरे पेड़ोंके तले इधर उधर दूसरोंके पास गई, और मेरी बातोंको नहीं माना, यहोवा की यह वाणी है।
14
हे भटकनेवाले लड़को लौट आओ, क्योंकि मैं तुम्हरा स्वामी हूँ; यहोवा की यह वाणी है। तुम्हारे प्रत्थेक नगर पीछे एक, और प्रत्थेक कुल पीछे दो को लेकर मैं सिय्योन में पहुंचा दूंगा।
15
और मैं तुम्हें अपके मन के अनुकूल चरवाहे दूंगा, जो ज्ञान और बुद्धि से तुम्हें चराएंगे।
16
उन दिनोंमें जब तुम इस देश में बढ़ो, और फूलो-फलो, तब लोग फिर ऐसा न कहेंगे, “यहोवा की वाचा का सन्दूक”; यहोवा की यह भी वाणी हे। उसका विचार भी उनके मन में न आएगा, न लोग उसके न रहने से चिन्ता करेंगे; और न उसकी मरम्मत होगी।
17
उस समय सरूशलेम यहोवा का सिंहासन कहलाएगा, और सब जातियां उसी यरूशलेम में मेरे नाम के निमित्त इकट्ठी हुआ करेंगी, और, वे फिर अपके बुरे मन के हठ पर न चलेंगी।
18
उन दिनोंमें यहूदा का घराना इस्राएल के घराने के साय चलेगा और वे दोनोंमिलकर उत्तर के देश से इस देश में आएंगे जिसे मैं ने उनके पूर्वजोंको निज भाग करके दिया या।
19
मैं ने सोचा या, मैं कैसे तुझे लड़कोंमें गिनकर वह मनभावना देश दूं जो सब जातियोंके देशोंका शिरोमणि है। और मैं ने सोचा कि तू मुझे पिता कहेगी, और मुझ से फिर न भटकेगी।
20
इस में तो सन्देह नहीं कि जैसे विश्वासघाती स्त्री अपके प्रिय से मन फेर लेती है, वैसे ही हे इस्राएल के घराने, तू मुझ से फिर गया है, यहोवा की यही वाणी है।
21
मुण्डे टीलोंपर से इस्राएलियोंके रोने और गिड़गिड़ाने का शब्द सुनाई दे रहा है, क्योंकि वे टेढ़ी चाल चलते रहे हैं और अपके परमेश्वर यहोवा को भूल गए हैं।
22
हे भटकनेवाले लड़को, लौट आओ, मैं तुम्हारा भटकना सुधार दूंगा। देख, हम तेरे पास आए हैं; क्योंकि तू ही हमारा परमेश्वर यहोवा है।
23
निश्ख्य पहाड़ोंऔर पहाडिय़ोंपर का कोलाहल व्यर्य ही है। इस्राएल का उद्धार निश्चय हमारे परमेश्वर यहोवा ही के द्वारा है।
24
परन्तु हमारी जवानी ही से उस बदनामी की वस्तु ने हमारे पुरखाओं की कमाई अर्यात् उनकी भेड़-बकरी और गाय-बैल और उनके बेटे-बेटियोंको निगल लिया है।
25
हम लज्जित होकर लेट जाएं, और हमारा संकोच हमारी ओढ़नी बन जाए; क्योंकि हमारे पुरखा और हम भी युवा अवस्या से लेकर आज के दिन तक अपके परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप करते आए हैं; और हम ने अपके परमेश्वर यहोवा की बातोंको नहीं माना है।
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