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Jeremiah - यिर्मयाह
अध्याय :
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1
जब सिदकिय्याह राज्य करने लगा, तब वह इक्कीस वर्ष का या; और यरूशलेम में ग्यारह वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम हमूतल या जो लिब्नावासी यिर्मयाह की बेटी यी।
2
और उस ने यहोयाकीम के सब कामोंके अनुसार वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।
3
निश्चय यहोवा के कोप के कारण यरूशलेम और यहूदा की ऐसी दशा हुई कि अन्त में उस ने उनको अपके साम्हने से दूर कर दिया। और सिदकिय्याह ने बाबुल के राजा से बलवा किया।
4
और उसके राजय के नौवें वर्ष के दसवें महीने के दसवें दिन को बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने अपक्की सारी सेना लेकर यरूशलेम पर चढ़ाई की, और उस ने उसके पास छावनी करके उसके चारोंओर क़िला बनाया।
5
योंनगर घेरा गया, और सिदकिय्याह राजा के ग्यारहवें वर्ष तक घिरा रहा।
6
चौथे महीने के नौवें दिन से नगर में महंगी यहां तक बढ़ गई, कि लोगोंके लिथे कुछ रोटी न रही।
7
तब नगर की शहरपनाह में दरार की गई, और दोनोंभीतोंके बीच जो फाटक राजा की बारी के निकट या, उस से सब योद्वा भागकर रात ही रात नगर से निकल गए, और अराबा का मार्ग लिया। (उस समय कसदी लोग नगर को घेरे हुए थे)।
8
परन्तु उनकी सेना ने राजा का पीछा किया, और उसको यरीहो के पास के अराबा में जा पकड़ा; तब उसकी सारी सेना उसके पास से तितर-बितर हो गई।
9
सो वे राजा को पकड़कर हमात देश के रिबला में बाबुल के राजा के पास ले गए, और वहां उस ने उसके दण्ड की आज्ञा दी।
10
बाबुल के राजा ने सिदकिय्याह के पुत्रोंको उसके साम्हने घात किया, और यहूदा के सारे हाकिमोंको भी रिबला में घात किया।
11
फिर बाबुल के राजा ने सिदकिय्याह की आंखोंको फुड़वा डाला, और उसको बेडिय़ोंसे जकड़कर बाबुल तक ले गया, और उसको बन्दीगृह में डाल दिया। सो वह मृत्यु के दिन तक वहीं रहा।
12
फिर उसी वर्ष अर्यात् बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के राज्य के उन्नीसवें वर्ष के पांचवें महीने के दसवें दिन को जल्लादोंका प्रधान नबूजरदान जो बाबुल के राजा के सम्मुख खड़ा रहता या यरूशलेम में आया।
13
और उस ने यहोवा के भवन और राजभवन और यरूशलेम के सब बड़े बड़े घरोंको आग लगवाकर फुंकवा दिया।
14
और कसदियोंकी सारी सेना ने जो जल्लादोंके प्रधान के संग यी, यरूशलेम के चारोंओर की सब शहरपनाह को ढा दिश।
15
और जल्लादोंका प्रधान नबूजरदान कंगाल लोगोंमें से कितनोंको, और जो लोग नगर में रह गए थे, और जो लोग बाबुल के राजा के पास भाग गए थे, और जो कारीगर रह गए थे, उन सब को बंधुआ करके ले गया।
16
परन्तु, दिहात के कंगाल लोगोंमें से कितनोंको जल्लादोंके प्रधान नबूजरदान ने दाख की बारियोंकी सेवा और किसानी करने को छोड़ दिया।
17
और यहोवा के भवन में जो पीतल के खम्भे थे, और कुसिर्योंऔर पीतल के हौज जो यहोवा के भवन में थे, उन सभोंको कसदी लोग लोड़कर उनका पीतल बाबुल को ले गए।
18
और हांडिय़ों, फावडिय़ों, कैंचियों, कटोरों, घूपदानों, निदान पीतल के और सब पात्रोंको, जिन से लोग सेवा टहल करते थे, वे ले गए।
19
और तसलों, करछों, कटोरियों, हांडिय़ों, दीवटों, धूपदानों, और कटोरोंमें से जो कुछ सोने का या, उनके सोने को, और जो कुछ चान्दी का या उनकी चान्दी को भी जल्लादोंका प्रधान ले गया।
20
दोनोंखम्भे, एक हौज और पीतल के बारहोंबैल जो पायोंके नीचे थे, इन सब को तो सुलैमान राजा ने यहोवा के भवन के लिथे बनवाया या, और इन सब का पीतल तौल से बाहर या।
21
जो खम्भे थे, उन में से एक एक की ऊंचाई अठारह हाथ, और घेरा बारह हाथ, और मोटाई चार अंगुल की यी, और वे खोखले थे।
22
एक एक की कंगनी पीतल की यी, और एक एक कंगनी की ऊंचाई पांच हाथ की यी; और उस पर चारोंओर जो जाली और अनार बने थे वे सब पीतल के थे।
23
कंगनियोंके चारोंअलंगोंपर छियानवे अनार बने थे, और जाली के ऊपर चारोंओर एक सौ अनार थे।
24
और जल्लादोंके प्रधान ने सरायाह महाथाजक और उसके नीचे के सपन्याह याजक, और तीनोंडेवढ़ीदारोंको पकड़ लिया;
25
और नगर में से उस ने एक खोजा पकड़ लिया, जो योद्वाओं के ऊपर ठहरा या; और जो पुरुष राजा के सम्मुख रहा करते थे, उन में से सात जन जो नगर में मिले; और सेनापति का मुन्शी जो साधारण लोगोंको सेना में भरती करता या; और साधारण लोगोंमें से साठ पुरुष जो नगर में मिले,
26
इन सब को जल्लादोंका प्रधान नबूजरदान रिबला में बाबुल के राजा के पास ले गया।
27
तब बाबुल के राजा ने उन्हें हमात देश के रिबला में ऐसा मारा कि वे मर गए।
28
यो यहूदी अपके देश से बंधुए होकर चले गए। जिन लोगोंको नबूकदनेस्सर बंधुआ करके ले गया, सो थे हैं, अर्यत् उसके राज्य के सातवें वर्ष में तीन हजार तेईस यहूदी;
29
फिर अपके राज्य के अठारहवें वर्ष में नबूकदनेस्सर यरूशलेम से आठ सौ बत्तीस प्राणिीयोंको बंधुआ करके ले गया;
30
फिर नबूकदनेस्सर के राज्य के तेईसवें वर्ष में जल्लादोंका प्रधान नबूजरदान सात सौ पैंतालीस यहूदी जनोंको बंधुए करके ले गया; सब प्राणी मिलकर चार हाजार छ:सौ हुए।
31
फिर यहूदा के राजा यहोयाकीन की बंधुआई के सैंतीसवें वर्ष में अर्यात् जिस वर्ष बाबुल का राजा एबीलमरोदक राजगद्दी पर विराजमान हुआ, उसी के बारहवें महीने के पक्कीसवें दिन को उस ने यहूदा के राजा यहोयाकीन को बन्दीगृह से निकालकर बड़ा पद दिया;
32
और उस से मधुर मधुर वचन कहकर, जो राजा उसके साय बाबुल में बंधुए थे, उनके सिंहासनोंसे उसके सिंहासन को अधीक ऊंचा किया।
33
और उसके बन्दीगृह के वस्त्र बदल दिए; और वह जीवन भर नित्य राजा के सम्मुख भोजन करता रहा;
34
और प्रति दिन के खर्च के लिथे बाबुल के राजा के यहां से उसको नित्य कुछ मिलने का प्रबन्ध हुआ। यह प्रबन्ध उसकी मृत्यु के दिन तक उसके जीवन भर लगातार बना रहा।
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