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Verses
Hosea - होशे
अध्याय :
1
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9
10
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12
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14
1
हे इस्राएल, अपके परमेश्वर यहोवा के पास लौट आ, क्योंकि तू ने अपके अधर्म के कारण ठोकर खाई है।
2
बातें सीखकर और यहोवा की ओर फिरकर, उस से कह, सब अधर्म दूर कर; अनुग्रह से हम को ग्रहण कर; तब हम धन्यवाद रूपी बलि चढ़ाएंगे।
3
अश्शूर हमारा उद्धार न करेगा, हम घोड़ोंपर सवार न होंगे; और न हम फिर अपक्की बनाई हुई वस्तुओं से कहेंगे, तुम हमारे ईश्वर हो; क्योंकि अनाय पर तू ही दया करता है।।
4
मैं उनकी भटक जाने की आदत को दूर करूंगा; मैं सेंतमेंत उन से प्रेम करूंगा, क्योंकि मेरा क्रोध उन पर से उतर गया है।
5
मैं इस्राएल के लिथे ओस के समान हूंगा; वह सोसन की नाई फूले-फलेगा, और लबानोन की नाईं जड़ फैलाएगा।
6
उसकी जड़ से पौधे फूटकर निकलेंगे; उसकी शोभा जलपाई की सी, और उसकी सुगन्ध लबानोन की सी होगी।
7
जो उसकी छाया में बैठेंगे, वे अन्न ही नाईं बढ़ेंगे, वे दाखलता की नाई फूले-फलेंगे; और उसकी कीत्तिर् लबानोन के दाखमधु की सी होगी।।
8
एप्रैम कहेगा, मूरतोंसे अब मेरा और क्या काम? मैं उसकी सुनकर उस पर दृष्टि बनाए रखूंगा। मैं हरे सनौवर सा हूं; मुझी से तू फल पाया करेगा।।
9
जो बुद्धिमान हो, वही इन बातोंको समझेगा; जो प्रवीण हो, वही इन्हें बूफ सकेगा; क्योंकि यहोवा के मार्ग सीधे हैं, और धर्मी उन में चलते रहेंगे, परन्तु अपराधी उन में ठोकर खाकर गिरेंगे।।
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