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Verses
Jonah - योना
अध्याय :
1
2
3
4
1
यहोवा का यह वचन अमितै के पुत्र योना के पास पहुंचा,
2
उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरूद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है।
3
परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिथे उठा, और यापो नगर को जाकर तर्शीश जानेवाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साय होकर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।।
4
तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर या।
5
तब मल्लाह लोग डरकर अपके अपके देवता की दोहाई देने लगे; और जहाज में जो व्योपार की सामग्री यी उसे समुद्र में फेंकने लगे कि जहाज हल्का हो जाए। परन्तु योना जहाज के निचले भाग में उतरकर सो गया या, और गहरी नींद में पड़ा हुआ या।
6
तब मांफी उसके निकट आकर कहने लगा, तू भारी नींद में पड़ा हुआ क्या करता है? उठ, अपके देवता की दोहाई दे! सम्भव है कि परमेश्वर हमारी चिन्ता करे, और हमारा नाश न हो।।
7
तब उन्होंने आपस में कहा, आओ, हम चिट्ठी डालकर जान लें कि यह विपत्ति हम पर किस के कारण पक्की है। तब उन्होंने चिट्ठी डाली, और चिट्ठी योना के नाम पर निकली।
8
तब उन्होंने उस से कहा, हमें बता कि किस के कारण यह विपत्ति हम पर पक्की है? तेरा उद्यम क्या है? और तू कहां से आया है? तू किस देश और किस जाति का है?
9
उस ने उन से कहा, मैं इब्री हूं; और स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा जिस ने जल स्यल दोनोंको बनाया है, उसी का भय मानता हूं।
10
तब वे निपट डर गए, और उस से कहने लगे, तू ने यह क्या किया है? वे जान गए थे कि वह यहोवा के सम्मुख से भाग आया है, क्योंकि उस ने आप ही उनको बता दिया या।।
11
तब उन्होंने उस से पूछा, हम तेरे साय क्या करें जिस से समुद्र शान्त हो जाए? उस समय समुद्र की लहरें बढ़ती ही जाती यीं।
12
उस ने उन से कहा, मुझे उठाकर समुद्र में फेंक दो; तब समुद्र शान्त पड़ जाएगा; क्योंकि मैं जानता हूं, कि यह भारी आंधी तुम्हारे ऊपर मेरे ही कारण आई है।
13
तौभी वे बड़े यत्न से खेते रहे कि उसको किनारे पर लगाएं, परन्तु पहुंच न सके, क्योंकि समुद्र की लहरें उनके विरूद्ध बढ़ती ही जाती यीं।
14
तब उन्होंने यहोवा को पुकारकर कहा, हे यहोवा हम बिनती करते ळें, कि इस पुरूष के प्राण की सन्ती हमारा नाश न हो, और न हमें निर्दोष की हत्या का दोषी ठहरा; क्योंकि हे हयोवा, जो कुछ तेरी इच्छा यी वही तू ने किया है।
15
तब उन्होंने योना को उठाकर समुद्र में फेंक दिया; और समुद्र की भयानक लहरें यम गईं।
16
तब उन मनुष्योंने यहोवा का बहुत ही भय माना, और उसको भेंट चढ़ाई और मन्नतें मानीं।।
17
यहोवा ने एक बड़ा सा मगरमच्छ ठहराया या कि योना को निगल ले; और योना उस मगरमच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा।।
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